कामथ ने इस प्रयोग के जरिए दिखाया कि केवल बेहतर जानकारी ही मुनाफा कमाने के लिए पर्याप्त नहीं है। सही रणनीति और अनुशासित जोखिम प्रबंधन के बिना, सबसे सटीक पूर्वानुमान भी नुकसान में बदल सकते हैं।
क्या था यह प्रयोग?
इस सिम्युलेटेड प्रयोग में कुल 118 वित्त छात्रों को शामिल किया गया, जिन्हें 15 दिनों तक रोज़ाना 24 घंटे पहले वॉल स्ट्रीट जर्नल के पहले पन्ने तक पहुंच दी गई। विचार यह था कि यदि छात्रों को बाज़ार की बड़ी खबरें समय से पहले मिलें, तो वे ज़्यादा लाभ कमा सकेंगे।
परिणाम उम्मीदों से एकदम उलट रहे:
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आधे से अधिक छात्रों ने नुकसान उठाया।
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करीब 16% छात्र पूर्ण रूप से दिवालिया हो गए।
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हालांकि, छात्रों ने औसतन 51.5% बार बाज़ार की दिशा का सही अनुमान लगाया — जो संयोग से बेहतर प्रदर्शन था।
लेकिन फिर भी असफल क्यों हुए छात्र?
कामथ का विश्लेषण स्पष्ट था:
समस्या पूर्वानुमान में नहीं थी, बल्कि उनकी पोजीशन साइज़िंग में थी।
“कई छात्र एक ही ट्रेड पर अपने पूरे पोर्टफोलियो का बड़ा हिस्सा दांव पर लगा रहे थे। कुछ ने 20 गुना, यहां तक कि 60 गुना तक लीवरेज का इस्तेमाल किया,” कामथ ने अपनी पोस्ट में लिखा।”
जब वे सही होते थे, तो अच्छा लाभ मिलता था, लेकिन एक ही गलत फैसले से सब कुछ गंवा देते थे।
अनुभवी ट्रेडर्स ने कैसे प्रदर्शन किया?
इसी प्रयोग में पाँच अनुभवी ट्रेडर्स ने भी हिस्सा लिया, और उनके परिणाम पूरी तरह विपरीत थे।
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उनका औसत रिटर्न +130% रहा।
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उन्होंने बाज़ार की दिशा के अनुमान से ज़्यादा, जोखिम प्रबंधन और दांव के आकार पर ध्यान दिया।
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जब स्थिति स्पष्ट नहीं थी, तो छोटा दांव लगाया; और जब भरोसा पक्का था, तभी बड़ा दांव लगाया।
कामथ ने इसे “पोजीशन साइज़िंग की कला” बताया — जो अनुभव और अनुशासन से आती है।
बड़ा संदेश: सही होने से ज्यादा ज़रूरी है टिके रहना
कामथ ने जोर देकर कहा कि ट्रेडिंग में केवल सही अनुमान लगाना ही सब कुछ नहीं है। असली खेल है — लंबे समय तक टिके रहना।
उन्होंने इस प्रयोग के ज़रिए उस आम सोच पर चोट की, जिसमें अधिकतर रिटेल ट्रेडर केवल बाज़ार की दिशा पर फोकस करते हैं, लेकिन स्मार्ट ट्रेडर यह जानते हैं कि कितने का जोखिम उठाना है, और किस स्थिति में कितना दांव लगाना है।
कामथ ने फेमस हेज फंड मैनेजर रे डालियो का एक उद्धरण भी साझा किया:
“जो क्रिस्टल बॉल के भरोसे जीता है, वह टूटा हुआ कांच भी खा सकता है।”
तालेब का सैद्धांतिक समर्थन
कामथ ने इस प्रयोग को लेखक और दार्शनिक नासिम निकोलस तालेब के सिद्धांत से भी जोड़ा, जो कहते हैं कि सूचना तक जल्द पहुंच केवल तभी फायदेमंद है, जब उसके साथ निर्णय लेने की बुद्धिमत्ता और जोखिम नियंत्रण की क्षमता हो।
अंतिम सीख: भविष्यवाणी नहीं, रणनीति मायने रखती है
“अगर आप सही साबित होने से पहले ही दिवालिया हो जाते हैं, तो आपके सही होने का कोई मतलब नहीं,” कामथ ने अपनी पोस्ट का अंत इसी गहरे संदेश के साथ किया।”
यह प्रयोग एक ज़बरदस्त सबक है — खासकर युवाओं और नए निवेशकों के लिए — कि ट्रेडिंग में जानकारी, आत्मविश्वास और जोश के साथ-साथ अनुशासन, धैर्य और जोखिम प्रबंधन भी उतने ही ज़रूरी हैं।
📌 अस्वीकरण: यह किसी निवेश सलाह या सिफारिश के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें









