माले (मालदीव), 26 जुलाई — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मालदीव यात्रा ने दक्षिण एशिया की कूटनीति में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। जैसे ही पीएम मोदी मालदीव की राजधानी माले पहुंचे, वहां मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने प्रोटोकॉल तोड़कर खुद हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया। उनके साथ मालदीव सरकार के चार शीर्ष मंत्री — विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री, वित्त मंत्री और गृह मामलों के मंत्री — भी उपस्थित रहे।
यह वही मालदीव है, जिसने कुछ महीनों पहले तक भारत के खिलाफ तीखी बयानबाज़ी और सैन्य विमानों को हटाने की कोशिश की थी, लेकिन अब वही सरकार भारत से मदद की गुहार लगा रही है। पीएम नरेंद्र मोदी की इस यात्रा को भारत-मालदीव संबंधों में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।
हेलीकॉप्टर और डोर्नियर समझौता फिर से शुरू
भारत ने बड़प्पन दिखाते हुए मालदीव के साथ हेलीकॉप्टर और डोर्नियर विमानों के संचालन संबंधी समझौते को नवीनीकृत कर दिया है। यह निर्णय मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू प्रशासन के विशेष अनुरोध पर लिया गया है।
भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री ने माले में बताया कि फिलहाल मालदीव में तीन भारतीय सैन्य विमान — एक हेलीकॉप्टर और दो डोर्नियर — मानवीय सहायता के उद्देश्यों के लिए परिचालित हो रहे हैं। इन विमानों के संचालन के लिए अब भारतीय वर्दीधारी सैनिकों की जगह एक भारतीय सैन्य कंपनी के प्रशिक्षित कर्मियों को तैनात किया गया है।
पहले विरोध, अब विनती
गौरतलब है कि मुइज्जू सरकार ने हेलीकॉप्टर और विमान संचालन को पहले निलंबित कर दिया था और मई 2025 में समझौते के नवीनीकरण पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी। लेकिन अब भारत सरकार की स्पष्ट नीति और प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के चलते मालदीव को पीछे हटना पड़ा और समझौते को फिर से चालू करने की गुहार लगानी पड़ी।
मुइज्जू के कार्यकाल की पहली राजकीय यात्रा
पीएम मोदी की यह यात्रा राष्ट्रपति मुइज्जू के शासनकाल की पहली राजकीय यात्रा भी है। नवंबर 2023 में मुइज्जू के पदभार संभालने के बाद से भारत और मालदीव के संबंधों में खटास देखी गई थी, लेकिन अब यह यात्रा दोनों देशों के रिश्तों को नया आयाम देती है।
स्वतंत्रता दिवस पर मुख्य अतिथि
26 जुलाई को मालदीव के स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जो अपने आप में भारत-मालदीव संबंधों की मजबूती का संकेत है। यह दौरा यह भी दर्शाता है कि दबाव में आई मुइज्जू सरकार अब भारत की रणनीतिक और मानवीय सहायता को लेकर अधिक गंभीर हो गई है।
निष्कर्ष
मालदीव की मुइज्जू सरकार, जो कभी भारत के खिलाफ तीखे तेवर दिखा रही थी, अब भारत के सामने झुकती नजर आ रही है। पीएम मोदी की इस यात्रा ने भारत-मालदीव संबंधों में एक नई ऊर्जा भर दी है और यह साफ है कि दक्षिण एशिया में भारत की कूटनीति पहले से कहीं अधिक प्रभावशाली और संतुलित हो रही है।
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