विकसित भारत का सपना – अब सिर्फ़ सरकार की नहीं, जनता की जिम्मेदारी भी
आजादी के 100 साल पूरे होने पर, यानी 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प सिर्फ़ नीति-निर्माताओं और सरकार का नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक का साझा सपना बन चुका है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई राष्ट्रीय नेतृत्वकर्ताओं ने बार-बार यह दोहराया है कि भारत “2047 तक विकसित राष्ट्र” बन सकता है, लेकिन यह तभी संभव होगा जब सरकार के साथ-साथ आम जनता भी ‘जन भागीदारी’ यानी जन सहयोग के भाव को अपनाए।
सवाल यह है कि क्या वाकई हम जनता के सहयोग से 2047 से पहले ही यह लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं? इसका उत्तर है – हां, बशर्ते हर नागरिक जिम्मेदारी से आगे आए।
विकसित राष्ट्र का मतलब क्या होता है?
“विकसित देश” केवल आर्थिक ताकत का प्रतीक नहीं है। इसके कुछ प्रमुख संकेतक होते हैं:
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प्रति व्यक्ति आय का उच्च स्तर
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शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का सुलभ और गुणवत्तापूर्ण होना
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आधुनिक बुनियादी ढांचे का विकास
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प्रौद्योगिकी और नवाचार में अग्रणी होना
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सामाजिक समानता और कानून का पालन
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साफ़-सुथरा, पर्यावरण-संतुलित जीवन
भारत इन सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है, लेकिन अभी भी विकसित और विकासशील देशों के बीच की खाई को पाटना बाकी है। और यह कार्य सिर्फ़ सरकारों के दम पर नहीं हो सकता।
जन भागीदारी क्यों है जरूरी?
भारत की 140 करोड़ से अधिक आबादी, जिसमें युवा शक्ति सबसे ज्यादा है, अगर विकास प्रक्रिया का सक्रिय हिस्सा बनती है, तो यह जनसँख्या बोझ नहीं, ताकत बन सकती है।
जन भागीदारी के कुछ उदाहरण:
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स्वच्छ भारत मिशन – जब नागरिकों ने इसे सिर्फ सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि अपना व्यक्तिगत मिशन माना, तब सफाई की संस्कृति बनी।
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डिजिटल इंडिया – गाँव-गाँव में इंटरनेट और डिजिटल भुगतान प्रणाली आम नागरिकों ने अपनाई।
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जल जीवन मिशन – लाखों लोगों ने जल संरक्षण में भाग लिया, परिणामस्वरूप कई जिलों में भूजल स्तर सुधरा।
जब जनता केवल दर्शक नहीं, बल्कि सह-निर्माता बनती है, तब योजनाएं सिर्फ कागजों पर नहीं, जमीनी हकीकत बनती हैं।
2047 से पहले विकसित राष्ट्र बनने के लिए जनभागीदारी के मुख्य क्षेत्र
1. शिक्षा और कौशल विकास में नागरिकों की भागीदारी
हर नागरिक को यह समझना होगा कि शिक्षा सिर्फ डिग्री तक सीमित नहीं है। स्किल यानी कौशल में निवेश आज की जरूरत है।
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अभिभावकों का बच्चों को व्यावसायिक शिक्षा के लिए प्रेरित करना
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युवाओं का मुफ्त सरकारी कोर्सों का भरपूर लाभ लेना (जैसे PMKVY, डिजिटल स्किल इंडिया)
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स्कूलों-कॉलेजों में पढ़ाई के साथ-साथ समाजसेवा में भी भागीदारी
2. स्वास्थ्य और स्वच्छता: अपनी गली, अपना मोहल्ला
जनता को सिर्फ़ सरकारी अस्पतालों पर निर्भर रहने के बजाय साफ-सफाई, खानपान, योग और प्रिवेंटिव हेल्थ को जीवनशैली बनाना होगा।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में यदि हर नागरिक व्यक्तिगत और पारिवारिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो जाए, तो अस्पतालों का बोझ आधा हो सकता है।
3. लोकल से ग्लोबल: आत्मनिर्भर भारत का सहयात्री बनें
सरकार ने “वोकल फॉर लोकल” का नारा दिया है, लेकिन जब तक हर उपभोक्ता स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता नहीं देगा, यह आंदोलन अधूरा रहेगा।
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कुटीर उद्योग, हस्तशिल्प, घरेलू उत्पाद, स्टार्टअप को अपनाने से न केवल स्थानीय रोजगार बढ़ेगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था भी सशक्त होगी।
4. पर्यावरण और ऊर्जा संरक्षण: छोटी पहल, बड़ा असर
अगर हर नागरिक अपनी भूमिका को समझे – जैसे बिजली की बचत, प्लास्टिक का कम प्रयोग, पानी का संरक्षण, पौधारोपण – तो सस्टेनेबल डेवलपमेंट का रास्ता अपने आप आसान हो जाएगा।
डेटा और विश्लेषण: क्या संकेत दे रहे हैं आँकड़े?
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विश्व बैंक के अनुसार, भारत की GDP 2024-25 में $3.7 ट्रिलियन तक पहुँच चुकी है और अगले दशक में यह $10 ट्रिलियन के पार जा सकती है।
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भारत ने मीडियम ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स से छलांग लगाकर हाई कैटेगरी की ओर कदम बढ़ा दिया है।
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नवाचार सूचकांक में भारत 2023 में 40वें स्थान पर पहुंच चुका है, जो 2015 में 81वां था।
इन आँकड़ों से पता चलता है कि भारत की गति तेज़ है, अब जरूरत है उसे जनशक्ति से और भी अधिक तेज़ करने की।
निष्कर्ष: जन शक्ति = राष्ट्र शक्ति
एक विकसित भारत का सपना अब कोई कोरी कल्पना नहीं, बल्कि व्यवस्थित, चरणबद्ध और जन-आधारित लक्ष्य है।
सरकार योजनाएं बना सकती है, संसाधन दे सकती है, दिशा दिखा सकती है – लेकिन यदि हर नागरिक जिम्मेदारी ले, देश को अपना मानकर कार्य करे, तो यह सपना 2047 नहीं, उससे पहले ही साकार हो सकता है।
हर नागरिक को यह सोचना होगा – “मैं देश के विकास में क्या योगदान दे सकता हूँ?”
क्योंकि जब जन-जन बने विकास का वाहक, तभी राष्ट्र बने विकसित भारत।









