परिचय: महंगे टोल से राहत की दिशा में बड़ा कदम
भारत में सड़क यात्रा को तेज़, सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार लगातार किया जा रहा है। इन राजमार्गों पर बने लंबे पुल (bridges) और सुरंगें (tunnels) यात्रा का समय तो घटाते हैं, लेकिन साथ ही टोल दरें अक्सर यात्रियों के बजट पर असर डालती हैं।
इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने अब एक अहम निर्णय लिया है — पुलों और सुरंगों वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल दरों में 50% तक की कटौती की गई है। यह कदम न सिर्फ़ आम जनता को राहत देगा, बल्कि पर्यटन, व्यापार और लॉजिस्टिक्स को भी गति प्रदान करेगा।
यह निर्णय क्यों लिया गया?

टोल दरों को लेकर बीते कुछ वर्षों में लगातार शिकायतें और सुझाव सामने आते रहे हैं। लोगों का कहना था कि जैसे ही कोई वाहन पुल या सुरंग से गुजरता है, टोल की राशि आम रास्तों के मुकाबले दोगुनी या अधिक हो जाती है।
सरकार का तर्क था कि इन संरचनाओं को बनाने में लागत अधिक आती है, इसलिए शुल्क ज़्यादा लिया जाता है। लेकिन हालिया अध्ययन में यह पाया गया कि अधिक शुल्क के कारण:
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कई लोग वैकल्पिक और लंबा रास्ता चुनते हैं।
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मालवाहक वाहन टोल से बचने के लिए छोटे मार्गों का उपयोग करते हैं, जिससे स्थानीय सड़कें क्षतिग्रस्त होती हैं।
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टोल अधिक होने से पर्यटन क्षेत्रों में यातायात घटता है।
इन बिंदुओं को ध्यान में रखकर सरकार ने निर्णय लिया कि पुलों और सुरंगों से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल को तर्कसंगत किया जाए।
मुख्य बिंदु: क्या बदला गया है?
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टोल शुल्क में अधिकतम 50% तक की कटौती की गई है।
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यह कटौती उन मार्गों पर लागू होगी जहां यात्री या मालवाहन को विशेष रूप से पुल या सुरंग से गुजरना पड़ता है।
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नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू होंगी और इसका पालन सभी राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) संचालित टोल बूथों पर करना होगा।
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ई-टोल और फास्टैग के जरिए भुगतान करने वालों को अतिरिक्त छूट भी दी जा सकती है।
प्रभाव: आम जनता से लेकर व्यापारी तक को लाभ
1. यात्रियों के लिए सस्ता सफर
अब किसी सुरंग या पुल से गुजरना आम जेब पर भारी नहीं पड़ेगा। उदाहरण के तौर पर, जम्मू-कश्मीर की चेनानी-नाशरी सुरंग के टोल में कटौती से रोज़ाना यात्रा करने वालों को बड़ी राहत मिलेगी।
2. पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों में बने पुल और सुरंगें अब ज्यादा यात्रियों को आकर्षित करेंगी। पहले महंगे टोल के कारण लोग इन क्षेत्रों तक निजी वाहन से जाने से हिचकते थे।
3. लॉजिस्टिक्स और माल परिवहन में सुधार
व्यापारी और ट्रक ऑपरेटर अब अधिक लागत वहन किए बिना तेज़ और सुरक्षित मार्ग का चुनाव कर सकेंगे। इससे डिलीवरी टाइम कम होगा और वस्तुएं सस्ती पहुंचेंगी।
कुछ प्रमुख संरचनाएं जहां असर दिखेगा
| पुल/सुरंग | राज्य | पुराना टोल | संभावित नया टोल (50% कटौती के बाद) |
|---|---|---|---|
| बोगीबील ब्रिज | असम | ₹150 | ₹75 |
| बांद्रा-वर्ली सी लिंक | महाराष्ट्र | ₹70 | ₹35 |
| चेनानी-नाशरी सुरंग | जम्मू-कश्मीर | ₹180 | ₹90 |
| कोच्चि पुल | केरल | ₹80 | ₹40 |
| डिब्रूगढ़ ब्रिज | असम | ₹120 | ₹60 |
विशेषज्ञों की राय: स्वागतयोग्य कदम
डॉ. एम.के. वर्मा, परिवहन विशेषज्ञ, कहते हैं:
“टोल को तर्कसंगत करना एक ऐसा निर्णय है जो न केवल आम आदमी को राहत देगा बल्कि राष्ट्रीय राजमार्गों का उपयोग भी बढ़ाएगा। इससे समय, ईंधन और पर्यावरण — तीनों की बचत होगी।”
वहीं, फिक्की (FICCI) के एक बयान में कहा गया कि
“लॉजिस्टिक्स सेक्टर को यह निर्णय सीधा लाभ देगा। विशेषकर ई-कॉमर्स कंपनियों की डिलीवरी लागत घटेगी।”
आगे क्या होगा?
सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में टोल दरों की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी और जनहित में संतुलन बनाए रखा जाएगा। इसके लिए NHAI एक नया मूल्य निर्धारण फ्रेमवर्क भी तैयार कर रहा है जिसमें निर्माण लागत, मार्ग की लंबाई और उपयोगकर्ताओं की संख्या के आधार पर टोल तय किया जाएगा।
निष्कर्ष: विकास और जनकल्याण का संतुलन
राष्ट्रीय राजमार्गों के माध्यम से भारत ने तेज़, प्रभावी और आधुनिक सड़क परिवहन का मजबूत आधार खड़ा किया है। लेकिन यह तभी सफल होगा जब आम नागरिक उस सुविधा का सुलभ और सस्ता उपयोग कर सके।
पुलों और सुरंगों पर टोल दर में की गई यह कटौती सरकार की “सुविधा में वृद्धि और लागत में कमी” की नीति को दर्शाती है। यह कदम यात्री, व्यापारी, और पर्यावरण — सभी के लिए फायदेमंद साबित होगा।
अंततः, जब इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के साथ-साथ जन-सुविधा का भी ध्यान रखा जाए, तभी वह सच्चे अर्थों में राष्ट्र निर्माण का मार्ग बनता है।









