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वक्फ संपत्तियों का हर विवरण अब ‘उम्मीद’ पोर्टल पर होगा दर्ज: पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम

उम्मीद पोर्टल
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Bureau Report

परिचय: वक्फ संपत्तियों पर नियंत्रण और जवाबदेही की जरूरत क्यों है?

भारत में वक्फ संपत्तियां मुसलमानों की धार्मिक, सामाजिक और शैक्षिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए समर्पित की गई थीं। ये ज़मीनें और इमारतें कभी किसी व्यक्ति ने अल्लाह के नाम पर समर्पित कीं ताकि उनसे होने वाली आमदनी गरीबों, अनाथों, मदरसों और मस्जिदों के भले में लगाई जा सके।

लेकिन समय के साथ वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में अनियमितता, भ्रष्टाचार और जानकारी के अभाव की शिकायतें बढ़ने लगीं। ऐसे में अब सरकार ने वक्फ संपत्तियों की पाई-पाई का हिसाब डिजिटल पोर्टल ‘उम्मीद’ पर दर्ज करने की एक ऐतिहासिक पहल की है।

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क्या है ‘उम्मीद’ पोर्टल?

उम्मीद’ एक डिजिटल प्रबंधन पोर्टल है जिसे केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने विकसित किया है। इसका मकसद देशभर की वक्फ संपत्तियों का रिकॉर्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाना, उनका पारदर्शी तरीके से प्रबंधन करना और यह सुनिश्चित करना है कि संपत्तियों की आमदनी सही जगह खर्च हो।

इस पोर्टल पर वक्फ बोर्डों द्वारा संचालित सभी संपत्तियों की जानकारी स्थान, प्रकार, वर्तमान स्थिति, आमदनी, किरायेदार, उपयोगकर्ता, और विवादों की स्थिति के साथ अपलोड की जाएगी।


भारत में वक्फ संपत्तियों की स्थिति: आंकड़ों पर नज़र

  • 7 लाख से अधिक वक्फ संपत्तियां भारत में पंजीकृत हैं।

  • अकेले उत्तर प्रदेश, बंगाल, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में सबसे अधिक वक्फ ज़मीनें मौजूद हैं।

  • अनुमान के अनुसार, इन संपत्तियों की कुल बाजार कीमत लाखों करोड़ रुपये में है।

इसके बावजूद, इनसे होने वाली आय का बड़ा हिस्सा गलत हाथों में चला जाता है या पूरी तरह से नष्ट हो रहा है क्योंकि कहीं किराया बहुत कम है, कहीं ज़मीन पर कब्ज़ा है, तो कहीं देखरेख का अभाव है।


उम्मीद पोर्टल‘उम्मीद’ पोर्टल के उद्देश्य और विशेषताएं

1. पारदर्शिता और जवाबदेही

अब हर वक्फ संपत्ति का रिकॉर्ड पब्लिक डोमेन में होगा। कौन संपत्ति का इस्तेमाल कर रहा है, किसे किराए पर दी गई है, उससे कितनी आमदनी हो रही है — ये सब जानकारियां एक क्लिक पर उपलब्ध होंगी।

2. कब्जों और घोटालों पर रोकथाम

बहुत सी वक्फ संपत्तियां वर्षों से अवैध कब्जों में हैं या बेहद कम किराए पर दे दी गई हैं। पोर्टल से ऐसी सभी गड़बड़ियों की निगरानी और कार्रवाई संभव हो सकेगी।

3. आमदनी का सही उपयोग

अब यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि वक्फ संपत्तियों से जो पैसा आता है, वह मदरसों, गरीबों, मस्जिदों और समाज सेवा में इमानदारी से खर्च हो।

4. रियल टाइम अपडेटिंग

जब भी किसी वक्फ संपत्ति की स्थिति में कोई बदलाव होगा — जैसे बिक्री, लीज, किरायेदारी आदि — उसे तुरंत पोर्टल पर अपडेट करना होगा। इससे डुप्लिकेशन और धोखाधड़ी रोकी जा सकेगी।


कैसे होगा संपत्तियों का पंजीकरण?

➤ राज्य वक्फ बोर्ड की भूमिका

हर राज्य का वक्फ बोर्ड जिम्मेदार होगा कि वह अपनी क्षेत्रीय संपत्तियों की जानकारी पोर्टल पर अपलोड करे। यह एक क़ानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया होगी, जिसमें:

  • **जमीन का दस्तावेज़ (खसरा, खतौनी),

  • नक्शा,

  • किरायेदारी अनुबंध,

  • वर्तमान उपयोगकर्ता की जानकारी,

  • विवाद या केस की स्थिति**

जैसी जानकारियों को अनिवार्य रूप से दर्ज करना होगा।

➤ स्थानीय स्तर पर वक्फ प्रबंधन समिति

स्थानीय मस्जिद या मदरसा से जुड़ी वक्फ प्रबंधन समितियों को भी अब जवाबदेह बनाया जाएगा कि वे अपनी संपत्तियों की मौजूदा स्थिति को नियमित रूप से अपडेट रखें।


कुछ प्रमुख उदाहरण और सफलता की कहानियां

1. कर्नाटक वक्फ बोर्ड

कर्नाटक वक्फ बोर्ड ने वक्फ संपत्तियों को जीआईएस मैपिंग के जरिए चिन्हित करना शुरू कर दिया है। इससे भूमि पर अवैध कब्जों की पहचान आसान हुई है।

2. तेलंगाना में संपत्ति प्रबंधन प्रणाली

हैदराबाद में तेलंगाना वक्फ बोर्ड ने वक्फ ज़मीनों को क्यूआर कोड्स के जरिए टैग करना शुरू किया है, जिससे कोई भी व्यक्ति उस ज़मीन की वास्तविक स्थिति मोबाइल से देख सके।


चुनौतियां और संभावित समाधान

1. राजनीतिक दखलअंदाजी

वक्फ बोर्डों पर अक्सर राजनीतिक नियुक्तियों का आरोप लगता रहा है। इस पोर्टल की सफलता तभी सुनिश्चित होगी जब नियुक्तियां गैर-राजनीतिक और पारदर्शी हों।

2. पुराना और अधूरा रिकॉर्ड

कई वक्फ संपत्तियों के दस्तावेज़ अधूरे या विवादित हैं। इसके लिए प्राकृतिक सर्वेक्षण, ज़िला स्तर पर जांच और डिजिटल रिकॉर्डिंग की जरूरत होगी।

3. तकनीकी ज्ञान की कमी

स्थानीय समितियों के पास डिजिटल जानकारी का अभाव हो सकता है। इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम और तकनीकी सहायता टीमों की नियुक्ति ज़रूरी है।


निष्कर्ष: वक्फ संपत्तियों के नए युग की शुरुआत

उम्मीद’ पोर्टल केवल एक तकनीकी मंच नहीं, बल्कि यह भरोसे और जवाबदेही का प्रतीक है। इससे वक्फ संपत्तियों की वास्तविक ताकत सामने आएगी और उनकी आमदनी समाज के उन तबकों तक पहुंचेगी, जिनके लिए वे वजूद में आई थीं।

यह पहल न सिर्फ़ धार्मिक न्यास की गरिमा को बहाल करती है, बल्कि आर्थिक न्याय का भी मार्ग प्रशस्त करती है। यदि इसे सही ढंग से लागू किया गया, तो यह कदम भारत में मुस्लिम समुदाय की सामाजिक प्रगति और आर्थिक पारदर्शिता का मील का पत्थर बन सकता है।

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