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सेबी ने नियमों के उल्लंघन के चलते अमेरिकी कंपनी जेन स्ट्रीट को शेयर बाजार में व्यापार करने से रोका: सख्त कदम उठाया गया

ज़ेन स्ट्रीट
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Bureau Report

नई दिल्ली, जुलाई 2025:
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने अमेरिका की प्रसिद्ध ट्रेडिंग कंपनी जेन स्ट्रीट (Jane Street) पर भारतीय शेयर बाजार में कारोबार करने पर रोक लगा दी है। यह फैसला सेबी द्वारा की गई विस्तृत जांच और नियामकीय नियमों के उल्लंघन के बाद सामने आया है। यह कार्रवाई विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) पर निगरानी की गंभीरता को दर्शाती है और बाजार की पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए एक मजबूत संकेत देती है।


क्या है मामला?

सेबी के अनुसार, जेन स्ट्रीट ने भारतीय शेयर बाजार में कुछ अत्यधिक जटिल व्यापारिक रणनीतियों के तहत काम किया, जिनमें हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग (HFT) और आर्बिट्राज ट्रेडिंग प्रमुख हैं। इन रणनीतियों का उपयोग करते हुए कंपनी ने ऐसे पैटर्न बनाए जो बाजार की निष्पक्षता और पारदर्शिता को प्रभावित कर सकते थे।

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सेबी की जांच में यह भी सामने आया कि जेन स्ट्रीट द्वारा इस्तेमाल किए गए कुछ ट्रेडिंग एल्गोरिद्म ने अन्य निवेशकों को नुकसान पहुंचाने की संभावना बढ़ाई।

इन व्यापारिक गतिविधियों में सूचना की असमान उपलब्धता और तेज़ गति से खरीद-फरोख्त करके कीमतों को प्रभावित करने के संकेत भी मिले हैं।


सेबी की कार्रवाई के प्रमुख बिंदु

  • जेन स्ट्रीट ग्लोबल ट्रेडिंग एलएलसी और उसकी सहयोगी इकाइयों को तत्काल प्रभाव से भारतीय प्रतिभूति बाजार में निवेश या ट्रेडिंग करने से प्रतिबंधित कर दिया गया है।ज़ेन स्ट्रीट

  • सेबी ने कंपनी को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी करते हुए पूछा है कि क्यों न इसे लंबे समय तक प्रतिबंधित किया जाए।

  • फॉरेंसिक ऑडिट और डेटा एनालिटिक्स के माध्यम से यह निष्कर्ष निकाला गया कि कंपनी “मालिकाना हितों” का अनुचित लाभ ले रही थी।

  • यह भी पाया गया कि जेन स्ट्रीट ने कुछ लेन-देन में पारदर्शिता की कमी दिखाई और जानबूझकर डिटेल्स को छुपाया


जेन स्ट्रीट कौन है?

जेन स्ट्रीट एक ग्लोबल ट्रेडिंग फर्म है जो अमेरिका में मुख्यालय रखती है और दुनियाभर के बाजारों में एल्गोरिदमिक और गणित आधारित ट्रेडिंग के लिए जानी जाती है। यह कंपनी आमतौर पर हाई-वॉल्यूम और हाई-स्पीड ट्रेडिंग में संलग्न रहती है और दुनियाभर में अपनी तेज़ गणना और निर्णय प्रणाली के लिए पहचानी जाती है।

भारत में यह कंपनी एफपीआई (Foreign Portfolio Investor) के माध्यम से निवेश करती रही है और कुछ वर्षों में इसने बड़ी मात्रा में लेन-देन किए हैं।


विशेषज्ञों की राय: नियामकीय शक्ति का उचित प्रयोग

शेयर बाजार विशेषज्ञ विनय अग्रवाल कहते हैं,

“सेबी की यह कार्रवाई विदेशी निवेशकों को यह संदेश देती है कि चाहे आप कितने भी बड़े क्यों न हों, नियमों से ऊपर कोई नहीं है। बाजार की निष्पक्षता सबसे महत्वपूर्ण है।”

वहीं, नियामकीय मामलों की जानकार मीनाक्षी राव का मानना है कि

“यह कदम छोटे निवेशकों की सुरक्षा की दिशा में बड़ा और साहसी निर्णय है। यदि ऐसे एल्गोरिद्मिक ट्रेडिंग पैटर्न अनियंत्रित रहते, तो यह बाजार में अस्थिरता पैदा कर सकते थे।”


अतीत की कुछ समान कार्रवाइयाँ

सेबी पहले भी विदेशी और घरेलू संस्थानों पर सख्त कार्रवाई कर चुका है।

  • 2018 में इन्फोसिस के पूर्व कर्मचारियों द्वारा इनसाइडर ट्रेडिंग के मामले में सेबी ने जुर्माना लगाया था।

  • 2021 में Credit Suisse पर भी कुछ गलत ट्रेडिंग पैटर्न के लिए चेतावनी दी गई थी।

इस तरह की कार्रवाई से बाजार में नैतिक और पारदर्शी व्यापार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार होता है।


आगे का रास्ता क्या होगा?

अब जेन स्ट्रीट के पास सेबी को दिए गए नोटिस का जवाब देने और अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए सीमित समय है। यदि कंपनी संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं देती, तो उस पर लंबी अवधि का प्रतिबंध, जुर्माना, या अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

सेबी इस पूरे मामले में टेक्नोलॉजी, डेटा एनालिसिस और एल्गोरिदमिक मॉनिटरिंग का इस्तेमाल कर रही है, ताकि आने वाले समय में कोई अन्य कंपनी मैनिपुलेटिव ट्रेडिंग में न उलझे।


निष्कर्ष: बाजार में अनुशासन और निवेशकों का विश्वास सर्वोपरि

सेबी द्वारा जेन स्ट्रीट पर लगाया गया प्रतिबंध केवल एक संस्थान के विरुद्ध कार्रवाई नहीं, बल्कि बाजार में अनुशासन और न्याय के सिद्धांतों की पुन: स्थापना है।

यह कदम दिखाता है कि भारत का शेयर बाजार अब सिर्फ व्यापार का माध्यम नहीं, बल्कि एक कानूनी और नैतिक ढांचे में संचालित पारदर्शी प्रणाली बन चुका है। निवेशकों का भरोसा तभी कायम रह सकता है जब नियमों का पालन सुनिश्चित हो — और सेबी ने इस दिशा में एक सशक्त उदाहरण पेश किया है।

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