05 जुलाई 2025, शाम 6:48 बजे | पीआईबी दिल्ली
केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज गुजरात के आनंद में देश के पहले सहकारी विश्वविद्यालय “त्रिभुवन” सहकारी विश्वविद्यालय की भूमि पूजन की पूजा अर्चना की। इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्रभाई पटेल और सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. अंशु कुमार भूतानी सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
विकास का नया अध्याय: प्रधानमंत्री मोदी को श्रद्धांजलि
लोकमंत्री श्री अमित शाह ने कहा की प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने महान सहकारी नेता त्रिभुवन दास पटेल जी को भाव-भरा श्रद्धांजलि अर्पित किया। चार साल पहले मोदी सरकार ने सहकारिता मंत्रालय की स्थापना करके करोड़ों गरीबों और गांवों के लोगों में आत्मनिर्भरता की उम्मीद जागृत की थी।
60 नई पहल और सहकारिता की नई राह
श्री शाह ने बताया कि पिछले चार वर्षों में सहकारिता मंत्रालय ने सहकारी क्षेत्र के विकास, उत्थान और समतामूलक वृद्धि के लिए 60 महत्वपूर्ण पहलें शुरू की हैं। उनका उद्देश्य था— विभाजनरहित, पारदर्शी, लोकतांत्रिक और न्यायपूर्ण सहकारिता व्यवस्था तैयार करना।
“त्रिभुवन” सहकारी विश्वविद्यालय: उद्देश्य और विस्तार
- स्थान: आनंद, गुजरात
- क्षेत्रफल: 125 एकड़
- लागत: लगभग ₹500 करोड़
श्री अमित शाह ने कहा,
“यह विश्वविद्यालय सहकारी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए अभूतपूर्व कदम है। नई पीढ़ी को इसके माध्यम से तकनीकी ज्ञान, लेखांकन, वैज्ञानिक सोच, विपणन और सहयोग के मूल्यों की जानकारी प्राप्त होगी।”
नेपोटिज़्म को अलविदा — पारदर्शिता का मार्ग प्रशस्त
श्री शाह ने इस बात पर जोर दिया कि विश्वविद्यालय से योग्यता के आधार पर प्रशिक्षण, रोजगार और नियुक्ति सुनिश्चित होगी।
“यहाँ से जो शिक्षा प्राप्त करेगा, वही नौकरी पाएगा” — ऐसे फैसले से सहकारी संस्थाओं में “नेपोटिज़्म” और अनुचित चयन की ज़मीं ख़त्म हो जाएगी।
युवा, महिलाएँ और अनुसूचित वर्ग: सीखने का अवसर
युवाओं को तकनीकी कौशल, लेखांकन से लेकर वैज्ञानिक सोच और मार्केटिंग की समझ दिलाई जाएगी। इसमें दलितों, आदिवासियों और महिलाओं को विशेष महत्व मिलेगा ताकि समाज के सभी वर्ग इस परिवर्तन की लहर में शामिल हों।
PACS और सहकारी संस्थाओं को कर्मयोगी तैयार होंगे
सरकार 2 लाख नए प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS) बनाएगी, जिनमें इस वर्ष 60 हजार नए PACS बनाए जाने की योजना है। मात्र PACS में ही 17 लाख से अधिक कर्मचारियों की आवश्यकता होगी।

त्रिभुवन विश्वविद्यालय इसी मानव संसाधन की पूर्ति करेगा। यहां नीति निर्माण, डेटा विश्लेषण और 5 से 25 वर्षों की योजनाएं तैयार करने वाले विशेषज्ञ तैयार होंगे।
अनुसंधान और नव नेतृत्व: भविष्य की पहचान
विश्वविद्यालय न केवल सहकारी कर्मचारियों को तैयार करेगा, बल्कि त्रिभुवन दास पटेल जैसे निस्वार्थ नेता भी करेगी तैयार, जो भविष्य में सहक्रिया आंदोलन का नेतृत्व कर सकें।
शैक्षिक पाठ्यक्रम में सहकारिता पर नया अध्याय
श्री शाह ने बताया कि CBSE ने कक्षा 9 से 12 तक पाठ्यक्रम में “सहकारिता” विषय जोड़ा है, और उन्होंने गुजरात सरकार से भी ऐसे विषय जोड़ने की अपील की।
त्रिभुवन दास पटेल का जीवन और उपलब्धियां
- 1946 में खोड़ा जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ शुरू हुआ।
- आज इस संघ में 36 लाख महिलाओं का योगदान है और इसका कारोबार ₹80,000 करोड़ से अधिक का पहुंच चुका है।
- अमूल विपणन मॉडल की नींव 1946 में सहकारी सिद्धांतों पर रखी गई थी, जिससे निजी डेयरी कंपनियों का सामना किया गया।
विश्व-स्तरीय सहकारिता: भारत की शक्ति
श्री शाह ने कहा कि हमारे राष्ट्रीय आदर्श “वसुधैव कुटुम्बकम” और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” ही सहकारिता की धारणा में निहित हैं।
यह प्रणाली न सिर्फ आर्थिक लाभ, बल्कि मानव, पशु और पर्यावरण कल्याण तक कार्य को निर्देशित करती है।
उन्हें विश्वास है कि “त्रिभुवन” सहकारी विश्वविद्यालय से 30 करोड़ सहकारी सदस्यों की सहक्रिया क्षमता, शिक्षा, नवाचार और अनुसंधान के माध्यम से वैश्विक अग्रणी संगठन बन जाएगी।
व्यापक दूरदर्शी लक्ष्यों की घोषणा
- सहकारी टैक्सी व保险 कंपनियों जैसी बहुस्तरीय सहकारी संस्थाओं के लिए तैयार विशेषज्ञ तैयार होंगे।
- विशेषज्ञों, प्रशिक्षकों और सहकारिता सलाहकों को देशभर से आमंत्रित किया जा रहा है।
निष्कर्ष: मजबूत, पारदर्शी और व्यापक सहकारी परिकल्पना
“त्रिभुवन” सहकारी विश्वविद्यालय सिर्फ एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि एक क्रांतिकारी पहल है जिस पर सहकारी आंदोलन को स्थायित्व और वैश्विक पहचान दोनों मिलेगी।
यह विश्वविद्यालय शिक्षा, विविधता, रोजगार और राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता की नींव रखेगा, जिससे भारत एक दुनिया के उत्कृष्ट सहकारी मॉडल की श्रेणी में स्थान पाएगा।
इस विश्वविद्यालय के माध्यम से एक नया युग आएगा जहाँ पारदर्शिता, नवाचार और मजबूत संस्थानों के सहारे भारत सभा-जन सहयोग का प्रेरक बनकर उभरेगा।









