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केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत: यूनिफाइड पेंशन योजना को भी मिलेगा एनपीएस जैसा टैक्स लाभ

Unified Pension Scheme
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Bureau Report

नई दिल्ली, जुलाई 2025:
केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों को एक और बड़ी सौगात दी है। वित्त मंत्रालय ने घोषणा की है कि अब यूनिफाइड पेंशन योजना (UPS) के तहत आने वाले कर्मचारियों को भी वही कर लाभ (Tax Benefits) मिलेंगे, जो अब तक केवल राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के तहत दिए जा रहे थे। यह फैसला सरकार के उस प्रयास का हिस्सा है, जिसके तहत वह सेवानिवृत्ति योजनाओं को पारदर्शी, लचीला और समान अवसर वाला बनाना चाहती है।


क्या है यह नया फैसला और इसका क्या मतलब है?

सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, अब यूपीएस के तहत आने वाले कर्मचारी भी अपने वेतन से होने वाले पेंशन योगदान पर टैक्स छूट, अतिरिक्त प्रोत्साहन, और निवेश पर कर लाभ प्राप्त कर सकेंगे। पहले ये लाभ केवल एनपीएस में शामिल कर्मचारियों को ही मिलते थे।

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इस कदम से यह सुनिश्चित होगा कि जो कर्मचारी एनपीएस की जगह यूनिफाइड पेंशन योजना चुनते हैं, उन्हें वित्तीय दृष्टि से कोई नुकसान न हो। इससे यूपीएस को भी एक मजबूत विकल्प के रूप में देखा जा सकेगा।


यूनिफाइड पेंशन योजना (UPS): क्या है यह योजना?

यूनिफाइड पेंशन योजना को 1 अप्रैल 2025 से केंद्र सरकार की नई सिविल सेवाओं में शामिल होने वाले कर्मचारियों के लिए शुरू किया गया था। यह योजना एनपीएस के एक विकल्प के रूप में पेश की गई थी।

मुख्य विशेषताएं:

  • सरकार का योगदान: कर्मचारी के मूल वेतन + महंगाई भत्ता (DA) का 18.5% सरकार योगदान के रूप में देगी।

  • कर्मचारी का योगदान: कुल वेतन का 10% योगदान कर्मचारी खुद देगा।

  • निश्चित पेंशन पर केंद्रित: यह योजना एनपीएस की तुलना में ज्यादा सुरक्षित और पूर्व-निर्धारित लाभ देने के उद्देश्य से लाई गई है।

  • नया विकल्प: वे सभी कर्मचारी जो पहले से एनपीएस के तहत आ चुके हैं, वे भी चाहें तो यूपीएस को चुन सकते हैं।


एनपीएस बनाम यूपीएस: टैक्स लाभ में अब कोई अंतर नहीं

अब तक, एनपीएस के तहत कर्मचारियों को 80CCD(1), 80CCD(1B) और 80CCD(2) के तहत टैक्स छूट मिलती रही है।

इसमें:

  • 80CCD(1): कर्मचारी के वेतन का 10% तक की राशि टैक्स छूट योग्य होती है।

  • 80CCD(1B): अतिरिक्त ₹50,000 तक की छूट निवेश पर मिलती है।

  • 80CCD(2): नियोक्ता (सरकार) के योगदान पर भी टैक्स छूट मिलती है।

अब ये सभी कर लाभ यूपीएस पर भी लागू होंगे। यानी अगर कोई कर्मचारी यूनिफाइड पेंशन योजना चुनता है, तो उसे अब वही टैक्स छूट मिलेगी, जो एनपीएस में मिलती थी।


सरकार का उद्देश्य: समानता और पारदर्शिता

वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इस कदम का उद्देश्य दोनों योजनाओं के बीच समानता लाना है, ताकि कर्मचारी सिर्फ कर लाभ के आधार पर योजना न चुनें, बल्कि उन्हें अपनी आवश्यकता और सुरक्षा के अनुसार विकल्प मिल सके।

Unified Pension Scheme

सरकार का मानना है कि सेवानिवृत्ति योजनाएं जितनी अधिक पारदर्शी, लचीली और कर-प्रभावी होंगी, उतना ही कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित और योजनाबद्ध रहेगा।

पीएफआरडीए की भूमिका और दिशा-निर्देश

पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने मार्च 2025 में यूनिफाइड पेंशन योजना के लिए आवश्यक नियम और दिशा-निर्देश जारी किए थे।

इन दिशा-निर्देशों में:

  • पेंशन फंड के प्रबंधन का ढांचा

  • पेंशन भुगतान की शर्तें और सुरक्षा

  • जोखिम प्रबंधन और पारदर्शिता मानक
    शामिल थे। यह सुनिश्चित किया गया था कि यूपीएस एक व्यवस्थित और सुरक्षित योजना के रूप में काम करे।


विशेषज्ञों की राय: कर्मचारी हित में बड़ा निर्णय

सेवानिवृत्ति योजनाओं के जानकार डॉ. राकेश वर्मा का कहना है:

“यूपीएस को टैक्स लाभ में शामिल करने का फैसला एक सुविचारित और स्वागतयोग्य कदम है। इससे कर्मचारियों को अधिक निश्चित पेंशन का भरोसा भी मिलेगा और टैक्स बचत का लाभ भी।”

सीनियर पेंशन कंसल्टेंट कविता जोशी कहती हैं:

“इस फैसले से सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह सिर्फ एनपीएस पर निर्भर नहीं रहना चाहती, बल्कि पेंशन क्षेत्र में विविधता लाना चाहती है।”


कर्मचारियों के लिए क्या होगा अगला कदम?

जो केंद्रीय कर्मचारी अभी एनपीएस के अंतर्गत हैं और यूपीएस में शामिल होना चाहते हैं, उन्हें सरकार द्वारा जारी विकल्प चयन फॉर्म भरकर तय समय सीमा के भीतर अपना निर्णय दर्ज कराना होगा।

यह भी उम्मीद है कि आने वाले समय में राज्य सरकारें भी यूपीएस मॉडल को अपनाने पर विचार कर सकती हैं।


निष्कर्ष: भविष्य की सुरक्षा को मिला नया आयाम

केंद्र सरकार द्वारा यूनिफाइड पेंशन योजना को एनपीएस जैसे कर लाभों में शामिल करना एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। इससे न केवल कर्मचारियों को विकल्प की स्वतंत्रता मिलेगी, बल्कि वे अपनी सेवानिवृत्ति की योजना को व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार चुन सकेंगे।

यह कदम सरकार की कल्याणकारी नीति, वित्तीय समावेशन और टैक्स फेयरनेस की दिशा में मजबूत पहल है, जो आने वाले वर्षों में लाखों सरकारी कर्मचारियों के लिए सुरक्षित भविष्य की गारंटी बन सकता है।

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